Tuesday, July 05, 2011

मैं सोच रहा था ..

मैं उपर वाले का तहे दिल से .. प्रत्येक पल के लिये .. शुक्रिया इसलिये अदा करना चाहता हूं कि उसने अभी तलक ऐसा कोई तरकीब किसी इंसान के दिमाग में नहीं दी कि कोई दूसरा यह जान सके कि मैं किसी के बारे में क्या सोच रहा हूं .. इसलिये तो मैं कहता हूं कि .. मुझे तो किसी भी आत्म कथा में पूर्णता नहीं दिखलाई पड़ती .. और ऐसा कहने के लिये .. मैं उनसे क्षमा मांगता हूं .. उनसे .. जो दावा करते हैं कि वे साफ-साफ दिल की सचाई लिख देने के हिमायती हैं ..

मैं सोच रहा था ..

(1) जब आप कुछ लिखें और फिर कुछ दिनो बाद .. जब अपने ही लिखे को .. फिर से पढ़ें और तब .. यदि आपको लगे कि उसमे किसी भी सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है .. तब समझो कि चिंतन की दिशा व अभिव्यक्ति सही है .. मैं सोच रहा था ..
(2) Mistake एक शब्द है और relations एक dictionary .. एक शब्द के लिये पूरी की पूरी dictionary कोई कैसे छोड़ सकता है .. मैं सोच रहा था ..

Sunday, July 03, 2011

मैं सोच रहा था ..

(01) सफलता और प्रशंसा .. का नशा .. उन पर सिर चढ़कर बोल रहा था .. वे आत्स्तुति कर रहे थे .. वे कह रहे थे कि वे नहीं जानते कि नशा क्या है .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..
(02) कोई एक पत्थर / कहीं यूं ही पड़ा हुआ था / एक दिन, उसे उठाकर / किसी ने पूजना शुरू कर दिया / मैं देख रहा था / मुझे जलन भी हो रहा थी / मैं सोच रहा था / वक्त-वक्त की बात थी / बात किस्मत की थी / कि / पत्थर के दिन भी पलटते हैं ..
(03) अल्प-विराम ही .. लेकिन .. दे जाती है छोटी सी कील .. रफ्तार को .. मैं पंक्चर बनवा रहा था .. मैं सोच रहा था ..
(04) Oxygen is an essential most .. Hydrogen is considered as a power .. and .. H2 + O2 = H2O .. H2O means WATER .. water means flexibility and adjustment and POWER also .. मैं सोच रहा था ..
(05) कोई लेख हो .. कोई रेखा हो .. कोई रंग हो .. कोई चित्र हो .. कोई धुन हो .. कोई आवाज हो .. कोई दृष्य हो .. कोई व्यक्ति हो .. कोई वक्तव्य हो .. कोई अभिव्यक्ति हो .. यदि .. कोई भी .. कभी भी .. आपकी सारी प्राथमिकताओं को परे ढकेल दे तो .. मैं सोच रहा था .. इससे शक्तिशाली .. क्या कोई चिंतन .. उस वक्त .. हो सकता है ..
(06) स्थिति मुफलिसी की थी / स्थिति चिंतन की थी / इसलिये .. स्थिति चिंताजनक थी / मैं सोच रहा था ..

Thursday, June 23, 2011

कुछ समझ नहीं आ रहा कि ..

कुछ समझ नहीं आ रहा कि बात तो केवल बात है कि या फिर बात वक्त की है कि हम रंग से प्रभावित है या फिर रेखा या शब्द .. हमारे चिंतन पर कौन कब्जा किये हुए हैं .. मैं सोच रहा था ..

Sunday, June 19, 2011

लोग .. क्यों मुझसे ..

यह कतई संभव नहीं है कि जि़दगी का हर मौसम सुहाना ही हो .. हर साल .. हर महीना .. हर सप्ताह .. हर दिन .. हर घंटे .. हर पल .. कोई अभूतपूर्व व सुंदर हो और यादगार या बेमिसाल हो .. तो फिर .. मुझे यह समझ नहीं आता .. कि .. लोग .. क्यों मुझसे .. ये अपेक्षा करते हैं कि .. मैं कैनवास पर जो कुछ भी बनाउंगा .. वह लाजवाब ही होगा ..

कभी .. किसी पल ..

कभी .. किसी पल .. जब कुछ भी याद आता है .. इस तरह से लिख देता हूं -
- किताब में कोई स्केच या रेखांकन अथवा फिर कोई अन्य फोटो या रेखात्मक अभिव्यक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है ..
- I am aware of .. the Newton’s Law of Gravitation .. BUT .. I am yet to understand .. audio-visual attraction ..
- कभी .. ऐसा भी होता है कि भ्रम की स्थिति .. अच्छी लगती है .. हकीकत से दिल परहेज करता है .. शायद इसलिये भी कि .. वास्तविकता कई बार . नहीं ,, कई कई बार लगा है .. कि किताब तो महज किताब है .. की प्रतिकूलता से .. मन वाकिफ होता है और इसलिये ऐसी किसी स्थिति से बचना चाहता है ..
- ये शब्द-संकलन है .. या फिर आइना है .. वक्त के किसी हिस्से का .. मैं सोच रहा था ..
- क्या फिर से .. मैं रेखाओं और रंगो के करीब आ रहा हूं .. चाहे इस बात में कितनी भी सचाई हो लेकिन .. यह तो तय है और सच है .. कि मैं रेखा और रंग के कारण ही जाना जाता हूं ..

Tuesday, June 07, 2011

तब दर्द .. दिल में होता है ..

जब कहीं कुछ खो जाता है .. फिर .. वजह .. चाहे कुछ भी हो .. तो .. दुख का होना स्वभाविक है और .. फिर यह उस घाव की तरह होता है जो शुरू में तो दर्द करता है लेकिन समय के साथ-साथ फिर जब क्रमशः घाव भरने लरता है तो दर्द भी .. धिरे-धिरे गायब होने लगता है .. कालांतर में .. चोट के निशान .. कभी याद दिलाते हैं तब दर्द .. दिल में होता है .. याद करके ..