Wednesday, December 01, 2010

मैं सोच रहा था ..

to have a better vision of the Future .. it is better to avoid the hang over of the past .. मैंने कहीं पढ़ा था / मैं सोच रहा था .. / कि / किसी दूसरे स्टेशन पर पहुंचने के लिये / एक स्टेशन को तो छोड़ना ही पड़ता है ..

पुलक ने कभी .. कहीं कहा था ..

Imperfection makes the world beautiful .. / पुलक ने कभी / कहीं कहा था .. / मुझे याद रहा .. / आज भी / और / याद रहेगा मुझे हमेशा .. / क्योंकि / यह तो / दर्शन की बात है .. / philosophy / है यह ..

Friday, November 26, 2010

कहीं पढ़ा था ..

मैंने कहीं पढ़ा था - वह व्यक्ति विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से हैं .. जिसके पास वो मन है जो परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानता .. । जब मैंने इसे पढ़ा तो मुझे वो पंक्तियां भी याद आ गई .. जिसे मैंने कभी पढ़ा था - मन के हारे हार है .. मन के जीते जीत .. ।

Monday, November 08, 2010

बातें ..

एक - वह तो कपटी है .. अंदर से कुछ तो बाहर से कुछ और ..दूसरा - क्या तुम्हे नारियल पसंद है ..एक - हां .. बेहद .. लेकिन ये नारियल को बीच में क्यों ले आये .. क्या मेरी बात .. तुम्हें पसंद नहीं आई ..दूसरा - बात मेरी पसंदगी या फिर नापसंदगी की नहीं है .. मैं तो यह कहना चाह रहा था कि, सभी कुछ प्राकृतिक है .. लोगों का व्यवहार भी .. शायद उसका व्यवहार भी जो बाहर से कुछ और तो अंदर से कुछ और .. कुछ-कुछ .. शायद नारियल की तरह .. । कोई फल किसी को पसंद है तो किसी और को कोई और फल .. । कोई दो थे .. बातें कर रहे थे .. मैं .. तीसरा .. भी वहीं था .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था .. ।

Friday, November 05, 2010

प्रयास ..

प्रतिभा .. रचनात्मकता .. हुनर .. ये सभी छिपे होते हैं .. कभी किसी धर्म के पीछे .. तो कभी किसी संप्रदाय के पीछे .. तो कभी किसी मान्यता की दीवार के पीछे .. तो कभी आर्थिक संकट के बोझ के नीचे .. । यह कहना तो आसान है कि इन्हें निकलना चाहिये और उभारना चाहिये .. लेकिन ऐसा कर पाना शायद कुछ हद तलक ही संभव है .. । इस दिशा में किये गये प्रयास की सफलता के प्रतिशत में जाने से अच्छा होगा कि प्रयास को भी तहे दिल से सराहा जाय .. ।

Sunday, October 24, 2010

बातें अनुरोध की ..

विरोध .. अवरोध .. गतिरोध .. प्रतिरोध .. । मैं पढ़ रहा था .. खबरों का सिलसिला .. लेकिन कहीं भी नहीं थी .. बातें अनुरोध की .. ।

Wednesday, September 15, 2010

a thoughtful message ..

इस दुनिया में ईश्वर का संतुलन कितना अदभुद है .. 100 किलो अनाज का बोरा जो उठा सकता है, वो खरीद नहीं सकता .. और जो खरीद सकता है वह उठा नहीं सकता .. ।
इस thoughtful SMS को डा. कविन्द्र सरभाई ने मुझे भेजा था .. ।